मेरठ कलेक्ट्रेट पर भाकियू का जोरदार घेरावः लंबित मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे किसान, सुरक्षा सख्त अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप, आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान। (ओमपाल सिंह ठाकुर)

 मेरठ कलेक्ट्रेट पर भाकियू का जोरदार घेरावः लंबित मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे किसान, सुरक्षा सख्त अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप, आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान।

मेरठ (ओमपाल सिंह ठाकुर) भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के आह्वान पर सोमवार को पुरे मेरठ जिले के किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट का किया घेराव। सुबह से ही अलग अलग गांवों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और निजी वाहनों के साथ सैकड़ों की संख्या में भाकियू कार्यकर्ताओं ने शहर में स्थित कलेक्ट्रेट परिसर की ओर कूच कर प्रशासन के खिलाफ जमकर की नारेबाजी। भाकियू (टिकैत) के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए प्रशासनिक रवैये पर कड़ा रोष जताते हुए कहा कि कई बार ज्ञापन सौंपने और 'किसान दिवस' की बैठकों में प्रमुखता से मुद्दे उठाने के बाद भी अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। प्रशासन किसानों की समस्याओं को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है, हद तो तब हो जाती है जब जिलाधिकारी से मिलने का समय मांगने पर भी किसानों को मिलने का समय तक नहीं दिया जाता हैं। इसी उपेक्षा के विरोध में आज किसानों को कलेक्ट्रेट का घेराव करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। अनुराग चौधरी जिलाध्यक्ष (भाकियू टिकैत) ने किसानों के लिए 5 मुख्य मांगों में (1) सहकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए और वितरण में हो रही अनियमितताओं पर तुरंत रोक लगे। (2) लंबे समय से अटका हुआ गन्ने का भुगतान ब्याज सहित जल्द से जल्द रिलीज कराया जाए। (3) बिजली के अतिरिक्त भार को वापस लिया जाए। (4) तहसील स्तर पर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और तहसीलों में व्याप्त भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों पर सख्त से सख्त कार्यवाही हो। (5) लोक निर्माण विभाग (PWD) पीडब्ल्यूडी से जुड़े विकास कार्यों और सड़कों के लंबित मुद्दों का त्वरित समाधान किया जाए। पर जोर दिया। कलेक्ट्रेट परिसर में छावनी जैसा माहौल, किसानों के बड़े प्रदर्शन और संभावित हंगामे को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन अलर्ट मोड़ पर नजर आ रहा हैं, कलेक्ट्रेट के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती भी की गई। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

किसानों का नारा जब तक हल नहीं, तब तक हटेगा नहीं किसान, प्रशासनिक अधिकारी मौके पर आकर उनकी सभी मांगों पर लिखित या ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक कलेक्ट्रेट परिसर में किसानों का धरना और घेराव इसी तरहा से जारी रहेगा।

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